Experience divine darshan of revered Shri Sawai Ji Maharaj and Lokdevta Baba Ramdev Ji, and check daily Aarti timings from anywhere.
New Interactive Feature.
Interactive Live Virtual Aarati
Perform automated circular Aarti thali rotation, ring sacred hanging temple bells with real sounds, blow conch (shankh), and shower fragrant flowers on Shri Sawai Ji Maharaj and Baba Ramdev Ji.
At Shri Sawai Ji Maharaj Dham Khadkali, all five daily prahar aartis and offerings are conducted with sacred Vedic rituals. Devotees are welcome to participate.
Mangla Aarti
05:15 AM (Morning)
Temple opening, morning wake-up prayers, and the first aarti of the day.
Bal Bhog Aarti
08:30 AM (Morning)
Offering of butter-sugar candy, fresh fruits, and milk naivedya with daily shringar darshan.
Rajbhog Aarti
12:15 PM (Noon)
Principal midday offering of pure lapsi/churma. Temple rest period 1:00 PM to 3:30 PM.
Special Maha Aarti
Sandhya Maha Aarti
07:15 PM (Evening)
Grand lamp lighting accompanied by conch shells, drums, bells, and sacred Dhuni Sahib aarti.
Shayan Aarti
09:30 PM (Night)
Final darshan of the day, night prayer, and closing of temple doors.
Special Note: On every Shukla Paksha Dooj (Dwitiya), Dashami-Ekadashi, and Purnima, special Maha Aarti and overnight devotional Jagrans are celebrated.
Daily Prayers & Hymns
Shri Sawai Ji & Baba Ramdev Ji Aarti and Chalisa
Click on the tabs below to read the sacred Aarti, Chalisa, and devotional prayers.
Shri Sawai Ji Maharaj Holy Aarti
Sacred Dham Khadkali Devotional Sankirtan
॥ श्री सवाई जी महाराज की पावन आरती ॥
जय सवाई देवा, स्वामी जय सवाई देवा।
खड़काळी धाम विराजे, सेवक सुख देवा॥ जय सवाई देवा...
भक्त जनों के काज संवारे, संकट हर लीन्हा।
दीन-दुखियों का उद्धार किया, दर्शन सुख दीन्हा॥ जय सवाई देवा...
मस्तक तिलक सोहे, गल मोतियन माला।
धूप-दीप नैवेद्य विराजे, आरती की थाला॥ जय सवाई देवा...
गौ सेवा और अन्नक्षेत्र की, महिमा अति भारी।
द्वार तिहारे जो कोई आवे, उतरे भव पारी॥ जय सवाई देवा...
संत समागम धूणी पावन, अद्भुत ज्योति जगे।
सवाई नाम जो सुमिरे निशदिन, पाप ताप भागे॥ जय सवाई देवा...
हाथ जोड़कर विनती करते, सेवक दास तिहारे।
कृपा दृष्टि बनाए रखना, जीवन पार उतारे॥ जय सवाई देवा...
॥ बोलो श्री सवाई जी महाराज की जय ॥
॥ खोजा की ढाणियां धाम की जय ॥
॥ लोकदेवता बाबा रामदेव जी की पावन आरती ॥
खम्मा-खम्मा ओ धनिया रुणीचे रा राजा।
अजमाल जी रा कंवरा, माता मेणादे रा जाया॥
रानी नेतल रा भरतार, मारो हेलो सुणो जी रामापीर।
खम्मा-खम्मा ओ धनिया रुणीचे रा राजा॥
गाँव-गाँव में परचा थारा, घर-घर ज्योत जगे।
नेजा फरूके थारे देवरिये, भक्त चरण पड़े॥
अंधे को प्रभु आँख देत हो, कोढ़ी को काया।
निर्धन को प्रभु धन देत हो, बांझन को बेटा॥
दुःख-दारिद्र सब दूर करो प्रभु, राखो लाज हमारी।
शरण पड़े की लाज राखजो, जय-जय अवतारी॥
॥ बोलो बाबारी री जय, जय बाबारी ॥
॥ रुणीचे रा राजा की जय ॥
॥ श्री सवाई चालीसा ॥
॥ दोहा ॥
श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार।
वरनऊँ सवाई विमल यश, जो दायक फल चार॥
खड़काळी पावन धरा, खोजा ढाणी मुकाम।
सवाई जी महाराज को, कोटि-कोटि प्रणाम॥
॥ चौपाई ॥
जय सवाई देवा सुखकारी। भक्त जनन के संकट हारी॥
नागौर भूमि में धाम तिहारो। सकल जगत में तेज उजारो॥
संत रूप धरि जग में आए। दीन अनाथों के कष्ट मिटाए॥
सत्य अहिंसा धर्म सिखाया। गौ माता का मान बढ़ाया॥
धूणी साहिब पावन भारी। जो ध्यावे उतरे भव पारी॥
अन्नक्षेत्र नित चालू रहवे। भूखे को प्रभु भोजन मिलवे॥
भजन कीर्तन नित प्रति होवे। जो सुमिरे सब पातक खोवे॥
रोग-दोष सब दूर भगावे। सवाई नाम जो निसदिन गावे॥
सच्चे मन से जो कोई ध्यावे। मनवांछित फल निश्चय पावे॥
सेवक जन पर कृपा कीजै। भक्ति-ज्ञान का अमृत दीजै॥
॥ दोहा ॥
सवाई चालीसा पढ़े, जो कोई चित्त लगाए।
संकट मिटे आनंद मिले, परम धाम को जाए॥
॥ श्री रामदेव चालीसा ॥
॥ दोहा ॥
जय जय श्री अजमाल सुत, जय मेणादे लाल।
जय जय नेतल के पति, काटो सकल जंजाल॥
भक्त हेतु प्रभु अवतरे, रुणीचा मुकाम।
बाबा रामदेव जी को, कोटि-कोटि प्रणाम॥
॥ चौपाई ॥
जय जय रामदेव सुरधामा। सकल मनोरथ पूरण कामा॥
अजमाल घर अवतार प्रभु लीना। माता मेणादे हर्षित कीना॥
बाल रूप अद्भुत दिखलाया। परचा दे सब अचरज पाया॥
भैरव राक्षस को संहारा। पोकरण वासी कष्ट निवारा॥
सुगना बाई का काज संवारा। रतनो की नैया पार उतारा॥
पँच पीर मक्के से आए। कटोरा परचा देख लजाए॥
पीरों के तुम पीर कहाए। सकल जगत में नाम कमाए॥
घोड़लियो चमकावे बाबा। नीले री असवारी बाबा॥
॥ दोहा ॥
रामदेव चालीसा जो, पाठ करे हर बार।
सुख-संपत्ति घर में बढ़े, कष्ट न व्यापै रार॥
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